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更新时间:2026-08-26   来源:互联网   编辑:北海帝  点击数: 1462次  

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National Sports Day 2025: आज ही के दिन जन्‍मा था 'हॉकी का जादूगर', देशभक्ति ऐसी कि ठुकराया हिटलर का ऑफर_我的网站

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A |      स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। देशभर में आज राष्‍ट्रीय खेल दिवस मनाया जा रहा है। अलग-अलग आयोजन हो रहे हैं। क्‍या आप जानते हैं कि राष्‍ट्रीय खेल दिवस 29 अगस्‍त को ही क्‍यों मनाया जाता है? दरअसल इसी दिन हॉकी के जादूगर कहे जाने वाले मेजर ध्‍यानचंद का जन्‍म हुआ था। ध्यान सिंह का जन्म 29 अगस्‍त 1905 को इलाहाबाद में हुआ था।,उनके दोस्त उन्‍हें चंद कहकर बुला‍ते थे। इसका कारण था कि वह ड्यूटी के बाद घंटों चांदनी रात में प्रैक्टिस करते थे। उन्हें हॉकी का जादूगर ही कहा जाता है। उन्होंने अपने करियर में 1000 से अधिक गोल दागे। उन्‍होंने 1928 एम्सटर्डम, 1932 लॉस एंजिल्स और 1936 बर्लिन में भारत को ओलंपिक खेलों में लगातार तीन गोल्‍ड मेडल जिताने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।,ध्यानचंद ने 16 साल में ब्रिटिश भारतीय सेना ज्‍वॉइन की थी। उनके पिता समेश्वर सिंह ब्रिटिश आर्मी में थे। इस दौरान ध्यानचंद ने हॉकी खेलना शुरू किया। 1922 और 1926 के बीच उन्होंने कई सेना हॉकी टूर्नामेंट और रेजिमेंटल खेलों में हिस्‍सा लिया था। 1928 में हॉकी को पहली बार ओलंपिक में शामिल किया गया।,1928 में हुए ओलंपिक में ध्यान चंद ने डेब्यू किया। ध्यानचंद ने 14 गोल कर भारत को गोल्‍ड मेडल जिताने में अहम भूमिका निभाई। ध्यानचंद ने 1956 में संन्‍यास का एलान किया था। उन्हें देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मभूषण से सम्मानित किया गया। आइए ध्यानचंद से जुड़ी कुछ रोचक बातें जानते हैं।,अपने बेजोड़ स्टिक-वर्क और बॉल कंट्रोल की वजह से मेजर ध्यानचंद को हॉकी का जादूगर कहा जाने लगा। वह गेंद और स्टिक के बीच ऐसे तालमेल बैठाते थे कि देखने वालों को भरोसा ही नहीं होता था। यह उनके अभ्‍यास का नतीजा था।,1936 के बर्लिन ओलंपिक में उनके खेल से प्रभावित होकर हिटलर ने उन्हें जर्मन सेना में शामिल होने का ऑफर दिया। हालांकि उन्होंने हिटलर के इस प्रस्‍ताव को ही ठुकरा दिया था। उन्‍होंने अपने देश को चुना था।,

जादुई स्टिक

नीदरलैंड में अधिकारियों को संदेह था कि ध्‍यानचंद हॉकी स्टिक में चुंबक या गोंद लगाकर खेलते हैं। इससे गेंद चिपक जाती है। ऐसे में उनकी हॉकी स्टिक की तोड़कर जांच भी की गई थी।

आत्मकथा

मेजर ध्‍यानचंदकी आत्मकथा का नाम 'गोल' है। यह 1952 में प्रकाशित हुई थी। इसके लेखक मेजर ध्यानचंद ही थे।

डॉन ब्रैडमैन हुए मुरीद

दिग्‍गज क्रिकेटर डॉन ब्रैडमैन ने मेजर ध्यानचंद के खेल को देखकर कहा था कि वे वैसे ही गोल करते हैं, जैसे क्रिकेट में रन बनाए जाते हैं। यह भी पढ़ें- National Sports Day 2024 पर PM Modi ने मेजर ध्यानचंद को किया याद, PR Sreejesh समेत इन दिग्गजों के ट्वीट भी वायरल。

B |     तुहिन शर्मा, देहरादून। राज्य में हर वर्ष की तरह होने वाले खेल महाकुंभ कराने को लेकर इस बार भी युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं, लेकिन इस बार खेल महाकुंभ में कई तरह के बदलाव व संशोधन किए जा रहे हैं।,राज्य स्तरीय ट्रॉफी को सीएम, जिला स्तरीय ट्रॉफी को सांसद, ब्लाक स्तरीय ट्रॉफी को विधायक और न्याय पंचायत स्तरीय ट्रॉफी को स्थानीय जनप्रतिनिधि का नाम दिया जाएगा। इसके अलावा राज्य स्तरीय विजेताओं की पुरस्कार राशि भी बढ़ाई जा रही है। युवा कल्याण विभाग ने यह प्रस्ताव शासन को भेजा है।,उत्तराखंड में हर वर्ष अक्टूबर से दिसंबर के बीच प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को चिह्नित करने के उद्देश्य से खेल महाकुंभ कराया जाता है। ताकि चिह्नीकरण के बाद अव्वल खिलाड़ियों को स्पोर्ट्स कालेज व खेल विद्यालयों में दाखिला दिलाया जाए। जहां उन्हें उच्च स्तरीय प्रशिक्षण मिले और वह अर्द्धसैनिक बल व पुलिस भर्ती की शामिल हो सके। जिला युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल, खेल विभाग और शिक्षा विभाग के समन्वय से खेल महाकुंभ होते हैं। खेल महाकुंभ की सबसे पहली प्रतिस्पर्धा न्याय पंचायत पर होती है।,इसमें अव्वल प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी ब्लाक स्तर में खेलते हैं। ब्लाक में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी जिले में मुकाबला करते हैं। फिर जिले में जबरदस्त प्रदर्शन करने पर उनका चयन राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए होता है। पिछले वर्ष तक ग्राम पंचायत स्तरीय ट्रॉफी में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले को 300 रुपये, द्वितीय को 200 और तृतीय को 150 रुपये बतौर पुरस्कार मिलते थे। ब्लाक में प्रथम स्थान पर रहने वाले खिलाड़ी को 500 रुपये, द्वितीय को 400 और तृतीय को 300 रुपये दिए जाते थे। ऐसे ही जिले में प्रथम को 800, द्वितीय को 600 और तृतीय को 400 रुपये का पुरस्कार मिलता था।,राज्य प्रतियोगिता में प्रथम को 1,500, द्वितीय को 1,000 और तृतीय को 700 रुपये दिए जाते थे। इसके अलावा चैंपियनशिप की व्यक्तिगत स्पर्धा में पांच खिलाड़ियों को स्वर्ण, तीन को रजत और दो को कांस्य पदक पुरस्कार मिलता है। टीम स्पर्धा में पांच टीमों को स्वर्ण, तीन को रजत और दो को कांस्य पदक दिए जाते हैं।,इस बार खेल महाकुंभ कराने के लिए युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल विभाग ने शासन को संशोधित प्रस्ताव भेजा है। शासन में मंथन होने के बाद जल्द ही खेल महाकुंभ की तिथियां निर्धारित होंगी। इसके बाद समिति गठन और खिलाड़ियों का पंजीकरण आरंभ होगा।,

खेल महाकुंभ की ट्राफियों के नाम पर इस बार बदलवा किए जा रहे हैं। खिलाड़ियों की इनाम राशि पर भी संशोधन चल रहा है। जल्द ही खेल महाकुंभ के आयोजन की तिथियां जारी की जाएंगी। इसमें सरकारी/निजी शिक्षण संस्थानों, विभिन्न छात्रावासों, निजी कोचिंग/ट्यूशन और खेल अकादमी के छात्र प्रतिभाग कर सकेंगे। -अमित सिन्हा, विशेष प्रमुख सचिव, (खेल)।

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Published on:18:51:11


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